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केएमसी में घोटाला, कमिश्नर स्मिता पांडे ने दिए जांच के आदेश

कागजों पर बंट गई राहत सामग्री, हकीकत में दफ्तरों में मिली डंप

16 Jun 2026

केएमसी में घोटाला, कमिश्नर स्मिता पांडे ने दिए जांच के आदेश

कोलकाता। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में आपदा प्रबंधन के तहत बांटी जाने वाली राहत सामग्री के वितरण में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली अनियमितता का मामला सामने आया है। राहतमूल कांग्रेस के कुछ पार्षदों और वार्ड कार्यालयों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद निगम आयुक्त स्मिता पांडे ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत और गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। आरोप है कि गरीबों और आपदा पीडि़तों के लिए आने वाली राहत सामग्री को वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने के बजाय कई वार्डों में छिपाकर या संग्रहित करके रखा गया था। इस मामले के उजागर होने के बाद निगम प्रशासन से लेकर राजनीतिक हलकों तक भारी खलबली मच गई है।
नगर निगम के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे खेल का खुलासा उपयोगिता प्रमाण पत्र की कड़ाई से हुई जांच के बाद हुआ है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, पार्षदों द्वारा राहत सामग्री बांटने के बाद निगम में यूसी जमा की जाती थी, जो इस बात का सबूत होती थी कि सामग्री जनता तक पहुंच चुकी है। लेकिन हालिया जांच में यह कड़वी सच्चाई सामने आई है कि कई मामलों में पार्षदों द्वारा यूसी तो जमा कर दी गई, मगर जमीन पर वास्तविक वितरण हुआ ही नहीं। पीडि़तों के हक का यह सामान अभी भी कई वार्ड कार्यालयों या अन्य गुप्त ठिकानों पर धूल फांकता हुआ पाया गया है। आयुक्त स्मिता पांडे ने सख्त लहजे में कहा है कि इस हेरफेर की तह तक जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि आखिर कागजों पर वितरण दिखाकर सामग्री को वार्ड कार्यालयों में किस मकसद से डंप करके रखा गया था। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ बेहद सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में दक्षिण कोलकाता के बेहाला इलाके के वार्ड नंबर 116 में एक बंद पड़ी कंपनी की जमीन से निगम की लाखों प्लास्टिक बाल्टियां रहस्यमय तरीके से बरामद हुई थीं। स्थानीय निवासियों द्वारा दी गई सूचना के बाद इस मामले ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया था, जहाँ भाजपा ने वार्ड 116 की राहतमूल पार्षद कृष्णा सिंह पर सीधे तौर पर बाल्टी घोटाले का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया था। अब बाल्टी और तिरपाल जैसी जरूरी आपदा सामग्रियों के इस बड़े पैमाने पर हुए दुरुपयोग ने निगम की साख पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है, और सबकी नजरें अब कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। 

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